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समस्या क्या है मन की उपज

                      इंसान का माइंड सेटअप कुछ ऐसा की वो केवल अपने अनुसार ही जीवन जीना चाहता है वो चाहता है की जैसा वह चाहता है वैसा ही हो , अगर थोड़ा सा भी उसके मन के विपरीत कुछ हुआ तो वो बौखला जाता है,  अपना आपा खो बैठता है और भगवान को कोसने लगता है । बहुत साधारण सा जवाब है साहब जो चीजे आपके मन के अनुसार हो तो ठीक है। परंतु आपके मन के अनुसार न हो वो आपके लिए समस्या है । आस्तिक तो भगवान का शरण ले कर धैर्य से की भगवान मेरे साथ है, समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर भी ले।  परंतु नास्तिक को तो खुद बिना किसी सहारे के समस्या सुलझाना पड़ेगा , ऐसे वक़्त मे चाहे वह जितनी बड़ी समस्या हो वो समस्या क्यो उत्पन्न हुई से ज्यादा, समस्या को वर्तमान मे सुलझाइए कैसे जाए इसमे फोकस कीजिये, समस्या के उत्पन्न होने का आकलन , समस्या के सुलझ जाने के बाद करें।   
अगर आप पहले से ये मान ले की हर दिन एक समस्या मेरे सामने आएगी और उसके लिए मुझे हमेशा तैयार रहना है, तो आप कभी निराश नही होंगे, हाँ थोड़ा वक़्त ज़रूर लग सकता है समस्या के समाधान होने में , परंतु आप कभी हारेंगे नहीं, अगर आपको हार मिल भी जाये तो आप उस समस्या से कुछ न कुछ नया ज़रूर सीखेंगे । अगर समस्या है तो समाधान भी है, समस्या को केवल समस्या मान लेना आपके मन मे निराशा के भाव का संचार करती है , जबकि समस्या को एक चुनौती की तरह देखना आपमे सकारात्मकता संचार का करती है।
समस्या क्या है...?


अच्छा, एक बार गहराई मे जा कर सोचते है एक कक्षा मे दो विद्यार्थी है एक को गणित सीखने मे मज़ा आता है, वो उसे बार बार सुलझाने की कोशिश करता रहता है तब तक, जब तक की वो गणित सुलझ नही जाता।
जबकि दूसरा विद्यार्थी को वही गणित एक बहुत बड़ी समस्या लगती है वो उस गणित के बारे मे बार बार , सोच सोच कर उसे बनाने करने की कोशिश नही करता, इसने गणित को एक समस्या की तरह देखा और मन मे संदेह था की ये गणित सुलझेगी भी या नही , जबकि पहला विद्यार्थी को गणित एक चुनौती की तरह देखता था  जिससे वो जीतना चाहता था। उसे हार का डर ही नही था, अगर वो बार बार हारता, तब भी हर बार कुछ न कुछ नया ज़रूर सीखता, और अंत मे जीत जाता, 
                                                   वही दूसरे विद्यार्थी ने गणित को केवल समस्या की तरह ही देखा, और उसे उसने बेमन से सुलझाने की कोशिश की,  और अंत मे हार गया ,
                                               जिन्दगी मे अगर लगातार समस्याएँ आ रही है तो कभी ये मत सोचना की सिर्फ मेरे जीवन मे ही क्यों आ रही है , बल्कि ये सोचना की समस्या का समाधान कैसे होगा ।

  यकीन मानिए जितना आप समस्याओं का समाधान करेंगे । उतना ही आपके कार्यशैली मे निखार आएगा। समस्या को अगर परेशानी के नज़र से देखेंगे तो वो आपको और अधिक परेशान करेगा, उसे एक चुनौती की तरह लीजिये । आप मे अपने आप सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आप उससे निपटने के तरीके तलाशने लग जाएंगे । धीरे-धीरे समस्याओ के समाधान करते-करते आपमे इतना आत्मविश्वास आ जाएगा की आप कभी भी किसी भी समस्या से विचलित नहीं होंगे । और हमेशा धैर्य से काम लेंगे ।
                आपको क्या लगता है की जीतने भी अमीर या बड़े हस्ती है क्या उनके जीवन मे समस्याए नही आई होंगी । सब के जीवन मे समस्यायें आती है बस काबिलियत अलग-अलग होती है समस्या से निपटने की , कोई जल्दी ही निराश हो जाता है तो कोई धैर्य से काम लेकर जीत जाता है ।



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