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खद्योत प्रभा (हाइकु)




मासूम बेटी
खौफ से आहत हो
उदास बैठी।

नभ निर्मल
स्वर्णाभ जल स्थल
खिला कमल।

करो वन्दन
स्वागताभिनन्दन
हे विद्वजन।

 मां सरस्वती
शारदे भगवती
दो शुद्ध मती।

 है गुलदस्ता
महंगा हो या सस्ता
खूब हँसता।


 सौम्य सुमन
हर लेता है मन
हां यकीनन।

 बादल दल
जब बने तरल
तभी तो जल।

 नन्ही सी परी
उड़ने की चाह में
पंख पसारी।


नील गगन
बादल अनुपम
जल दर्पण।

झील में नाव
नील शैल शिखर
जल अथाह।

कमल कली
सुशोभित अंजली
स्वागतांजली।

चुभते शूल
फिर भी यूं मुस्काते
हमेशा फूल।


￰खारा सोना  है
सपने संजोना  है
बीज बोना  है l

लाल  गुलाब
ओस से नहाकर
यूं लजवाब ।


  कृष्ण कुमार 'अजनबी'
देवभोग, गरियाबंद  छ.ग.
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