Loading Important Jobs...

जिन्दगी का सार प्रेम


जिन्दगी एक फल है,चूसो इसे जी भरके।
घूट घूट के मत जिवो,न ही जिवो मर मर के।।

प्रेम इसका रस है बढ़िया,छिलका है अहंकार।
दूर फेंक दो छिलको को,करो न इसका भंडार।।
www.kritirang.com

स्फूर्ति की दवा है ये नेक,तन्दरुस्ती का है राज।
दर्जनो ब्याधियाँ दूर करे,अदभूत है ये इलाज।।

जितना हो सके रस बाँटो,नातों मे रिश्तेदारों मे।
हर पहचान को देते जाओ,बाँटो मित्रो यारो मे।।

कोई इसका रहे न प्यासा,रहे न कोई मनहूस।
इस रस से बढ़कर कोई, दुसरा रस  न जूस।।

                           

संतोष कुमार साहू
                           रसेला (छुरा)छ.ग.
Blogger द्वारा संचालित.