जीवन पथ
दौड़ता चल दौड़
रूकना मत।
कांटे मिलेंगे
तभी चेहरे पर
फुल खिलेंगे।
थकना मत
चलना मीलों दूर
लक्ष्य अनंत।
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हारना नही
हार मानना नही
सौ बार सही।
कर्म महान
लक्ष्य पर हो ध्यान
हो पहचान।
कुछ तो करो
रूको न पलभर
जियो या मरो।
रचना:विरेन्द्र कुमार साहू
बोड़राबाँधा (पाण्डुका)
जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
