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मातृभूमि हिन्दुस्तान हो



जब भी जनम मिले मुझे  मातृभूमि हिन्दुस्तान हो।
हिन्दी हो मेरी मातृभाषा  हिन्दूत्व मेरी पहचान हो।
मेरा हाथ उठे परहित हेतु काज अति  पावनकारी।
धर्म-कर्म रामायण सरिस ज्ञान गीता-सी महान हो॥


माँ भारती का मान बढ़ाऊँ अखिल विश्व में हरदम।
मेरी सेवा सत्कार्य चेष्टा  समर्पित सपूत समान हो॥


इतना सामर्थ्य देना हे विधाता मेरे इन भुजाओं में।
हरबार सफलता मिले  जो राष्ट्रभक्ति इम्तिहान हो॥

मर जाऊँ मिट जाऊँ मैं मातृभूमि की मिट्टी चुमते।
राष्ट्रधर्म की वेदी पर वीर सौ-सौ जीवन कुरबान हो॥



                                                                             रचना : विरेन्द्र कुमार साहू बोड़राबांधा (पांडुका)
                                                                                          जिला गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ४९२१०९
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