पशुधन



पशुधन सबसे है बड़ा, बन जाओ गोपाल
दूध दही घी छाछ दे, करदे मालामाल ।।

लक्ष्मी जी की वास है, गौमाता के शीश।
सुरभि कहते हैं इसे, साथ रहे जगदीश ।

औषधि है गौमूत्र भी, गोबर बनते खाद।
खेतों की सब्जी रहे, लिए अनोखे स्वाद ।।

दर पर रंभाती मिले, चांट रही हो द्वार।
शुभफल दाती मात है,कर गौ माँ से प्यार ।।

वैतरणी से तारती, करती है उद्धार।
गो वध कभी न कीजये, कहते संत पुकार ।।

केवरा यदु"मीरा "
राजिम

Ads

Blogger द्वारा संचालित.